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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 49
यः स्वयं साधयेदर्थमुत्तमर्णोऽ धमर्णिकात्‌ । न स राज्ञाऽभियोक्तव्यः स्वकं संसाधयन्धनम्‌ ।।
जो ऋण देनेवाला ऋण लेनेवाले में बल आदि के द्वारा अपना ऋण में दिया हुआ धन वसूल करता हो, उसे राजा मना न करे अर्थात्‌ अपना ऋण वसूल कर लेने दे।
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