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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 46
अधमर्णार्थसिद््यर्थमुत्तमर्णेन चोदितः । दापयेद्धनिकस्यार्थमधमर्णाद्विभावितम्‌ ।।
(यहाँ तक साधारण रूप से व्यवहार देखने की विधि कहकर आगे ऋण लेने पर व्यवहार देखने की विधि कहते हैं--) ऋण देने वाले अपना ऋण पाने के लिए राजा के यहाँ प्रार्थना की हो तो वह राजा (आगे कहे गये लेख, साक्षी आदि प्रमाणों से प्रमाणित) धन को ऋण लेने वालों से ऋण देनेवालों को दिलवाये।
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