(जाति-देश-कुल धर्मानुसार) अपने-अपने कार्यो को करते तथा अपनेअपने कार्य में स्थित होकर दूर रहते हुए (साक्षात् नित्य-नैमित्तिक सम्बन्ध नहीं रहने पर) भी मनुष्य लोकप्रिय हो जाता है।
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