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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 397
तन्तुवायो दशपलं दद्यादेकपलाधिकम्‌ । अतोऽन्यथा वर्तमानो दाप्यो - द्वादशक दमम्‌ ।।
कपड़ा बुनने वाला (जुलाहा आदि) दश पल सूत के बदले में (माँड़ी आदि लगने में बढ़ जोने के कारण) ग्यारह पल कपड़ा दे, इसके विपरीत करने (कम कपड़ा देने) वाले को राजा बारह पण (८।१३६) दण्ड दिलवावे (तथा स्वामी अर्थात्‌ सूत के बदले में कपड़ा लेने वाले को उचित कपड़ा दिलवाकर सन्तुष्ट करे)।
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