शाल्मलीफलके श्लक्ष्णे - नेनिज्यान्नेजकः शनैः ।
न च वासांसि वासोभिर्निर्हरेन्न च वासयेत् ।।
धोबी सेमल की लकड़ी के बने हुए चिकने पाढ (मोटे तख्ते) पर धीरे-धीरे कपड़ों को धोवे, किसी के कपड़े को दूसरों के कपड़ों में नहीं मिलावे और दूसरे को पहनने के लिए नहीं देवे। (यदि वह ऐसा नहीं करे तो राजा के द्वारा दण्डनीय होता है)।
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