श्रोत्रियं व्याधितात्तौं च बालवृद्धावकिञ्चनम् ।
महाकुलीनमार्यं च राजा सम्पूजयेत्सदा ।।
श्रोत्रिय (विद्वान् तथा आचारवान् ब्राह्मण) रोगी, (पुत्रादि के विरह से) दुःखी, बालक, बृद्ध, दरिद्र, श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न और उत्तम चरत्रि वाले की राजा सदैव पूजा (दान, मान आदि हिताचरण से सत्कार) करता रहे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।