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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 394
अन्धो जडः पीठसपीं सप्तत्या स्थविरश्च यः । शरोत्रियेषूपकुर्वश्च न दाप्याः केनचित्करम्‌ ।।
अन्धा, जड़, पङ्ग, सत्तर वर्ष से अधिक बूढ़ा और अन्न आदि से श्रोत्रियों का उपकार करते रहने वाला, इन लोगों से कोई (क्षीणकोष वाला भी) राजा कर (टैक्स) नहीं लेवे।
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