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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 393
श्रोत्रियः श्रोत्रियं साधुं भूतिकृत्येष्वभोजयन्‌ । तदन्नं द्विगुणं दाप्यो हैरण्यं चैव माषकम्‌ ।।
प्रतिवेशी या अनुवेशी सज्जन श्रोत्रिय को विवाहादि शुभ कार्यो में नहीं भोजन कराने वाले श्रोत्रिय से (राजा) उस (भोजन नहीं कराये गये) श्रोत्रिय के लिए दुगुना अन्न तथा एक मासा सोना दण्ड स्वरूप दिलवावे।
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