प्रतिवेश्यानुवेश्यौ च कल्याणे विंशतिद्विजे ।
अर्हावभोजयन्विप्रो दण्डमर्हति माषकम् ।।
किसी शुभ कार्य में बीस ब्राह्मणों को भोजन कराना हो तो प्रतिवेशी और :अनुवेशी योग्य ब्राह्मणों को नहीं भोजन कराने वाला ब्राह्मण एक मासे चाँदी से दण्डनीय होता है।
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