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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 391
यथार्हमेतानभ्यर्च्य ब्राह्मणैः सह पार्थिवः । सन्त्वेन प्रशमय्यादौ स्वधर्म प्रतिपादयेत्‌ ।।
राजा यथोचित पूजा (आदर-सत्कार) कर ब्राह्मणों के साथ सान्त्व (शमप्रधान) वचनों से उन्हें शान्त करके इनका अपना जो धर्म है, उसे समझावे।
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