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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 387
एतेषां निग्रहो राज्ञः पञ्जानां विषये स्वके । साम्राज्यकृत्सजात्येषु लोके चैव यशस्करः ।।
इन पाँचों (चोर, परस्त्री सम्भोगकर्ता, कटुभाषणकर्त्ता, साहसकर्मकर्त्ता और दण्डपारुष्यकर्त्ता) का अपने राज्य में निग्रह करने वाला राजा समानजातीय राजाओं में साम्राज्य करने वाला तथा इस लोक में यशस्वी होता है।
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