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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 386
यस्य स्तेनः पुरे नास्ति नान्यस्त्रीगो न दुष्टवाक्‌ । न साहसिकदण्डघ्नो स राजा शक्रलोकभाक्‌ ।।
जिस (राजा) के राज्य में चोर, परस्त्री-सम्भोग करने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, गृहदाह आदि साहस कार्य करने वाला तथा कठोर दण्ड (ताडनमारण आदि दण्ड पारुष्य) करने वाला पुरुष नहीं है, वह (राजा) स्वर्गगमन करता है।
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