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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 385
अगुप्ते क्षत्रियावैश्ये शूद्रां वा ब्राह्मणो व्रजन्‌ । शतानि पञ्च दण्ड्यः स्यात्सहस्त्रं त्वन्त्यजस्त्रिम्‌ ।।
(पति आदि से असुरक्षित) क्षत्रिया, वैश्या अथवा शूद्रा के साथ सम्भोग करने वाला ब्राह्मण ५०० पण से तथा अन्त्यज स्त्री (चाण्डाली आदि सर्वाधम स्त्री) के साथ सम्भोग करने वाला (ब्राह्मण) १००० पण से दण्डनीय होता है।
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