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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 383
सहस्र ब्राह्मणो दण्डं दाप्यो गुप्ते तु ते व्रजन्‌ । शूद्राया क्षत्रियविशोः साहस्रो वै भवेद्दमः ।।
(पति या अभिभावकादि से सुरक्षित) क्षत्रिया या वैश्या के साथ में संभोग करने वाला ब्राह्मण १००० पण से दण्डनीय है तथा सुरक्षित शूद्रा के साथ संभोग करने वाले क्षत्रिय और वैश्य भी १०००-१००० पण (८।१३६) से ही दण्डनीय होते है।
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