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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 382
वैश्यश्चेतकषत्रियां गुप्तां वैश्यां वा क्षत्रियो ब्रजेत्‌ । यो ब्राह्मण्यामगुप्तायां तावुभौ दण्डमर्हतः ।।
(पति आदि के द्वारा सुरक्षित) क्षत्रिया के साथ वैश्य तथा वैश्या के साथ क्षत्रिय सम्भोग करे तो वे अरक्षित ब्राह्मणी के साथ सम्भोग करने पर कहे गये दण्ड से (८३७६ के अनुसार वैश्य ५०० पण तथा क्षत्रिय १००० पण) दण्डनीय है।
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