न जातु ब्राह्मणं हन्यात्सर्वपापेष्वपि स्थितम् ।
राष्ट्रादेनं बहिः कुर्यात्समग्रधनमक्षतम् ।।
राजा समस्त पाप करने वाले भी ब्राह्मण का वध कभी न करे; किन्तु सम्पूर्ण धन के साथ अक्षत शरीर वाले उस (ब्राह्मण) को राज्य से निर्वासित कर दे।
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