ब्राह्मण को प्राणदण्ड होने पर उसका मुण्डन करा देना ही उसका प्राणदण्ड होता है तथा अन्य वर्णो (क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) का प्राणनाश करना ही प्राणदण्ड होता है।
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