(पति आदि से सुरक्षित तथा) गुणवती ब्राह्मणी के साथ यदि वे दोनों (वैश्य तथा क्षत्रिय) मैथुन करें तो वे शूद्र के समान (८।३७४) दण्डनीय हैं या तृणाग्नि में जलाने योग्य हैं।
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