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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 374
शूद्रो गुप्तमगुप्तं वा द्वैजातं वर्णमावसन्‌ । अगुप्तमङ्गसर्वस्वी गुप्तं सर्वेण हीयते ।।
(पति या अभिभावक के द्वारा) सुरक्षित या असुरक्षित द्विज-स्त्री के साथ सम्भोग करने वाले शूद्र को, असुरक्षित द्विज स्त्री के साथ सम्भोग करने पर उसके लिङ्ग को कटवाकर तथा धन को जप्तकर दण्डित करे तथा सुरक्षित द्विज-स्त्री के साथ सम्भोग करने पर उसकी सब सम्पत्ति को जप्तकर उसे प्राणदण्ड से दण्डित करे।
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