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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 373
संवत्सरेभिशस्तस्य दुष्टस्य द्विगुणो दमः । व्रात्यया सह संवासे चाण्डाल्या तावदेव तु ।।
परस्त्री-गमन से दूषित (अदण्डित भी) पुरुष एकवर्ष के बीतने पर पुन: परस्त्रीगमन रूप अपराध करे तो उसे पूर्वोक्त दण्ड से दुगुना दण्ड होता है; तथा हत्या (१०।२०) तथा चाण्डाली (१०।२६-२७) के साथ गमन (सम्भोग) करने पर भी उतना (दुगुना) ही दण्ड होता है।
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