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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 372
पुमांसं दाहयेत्पापं शयने तप्त आयसे । अभ्यादध्युश्च काष्ठानि तत्र दह्येत पापकृत्‌ ।।
और उस पापी जार को तपाये हुए लोहे की खाट पर सुलाकर जलावे तथा उस खाट पर लोग लकड़ी डाल दें, जिसमें वह पुरुष जल (कर मर) जाय।
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