मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 368
सकामां दूषयंस्तुल्यो नाङ्गलिच्छेदमाप्नुयात्‌ । द्विशतं तु दमं दाप्यः प्रसङ्गविनिवृत्तये ।।
समान जातिवाली कामवासनायुक्त कन्या के साथ सम्भोग न करके उसकी योनि में अङ्गुलि डालकर जो पुरुष उस कन्या को दूषित करे; राजा उस पुरुष की अङ्गुलि तो नहीं कटवावे, किन्तु भविष्य में ऐसे प्रसङ्ग को रोकने के लिए उसे २०० पण (८॥१३६) से दण्डित करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें