अपने से श्रेष्ठ जाति वाले पुरुष के साथ सम्भोग करती हुई कन्या को (राजा) थोड़ा भी दण्डित न करे, किन्तु अपने से हीन जाति वाले पुरुष का सेवन करती हुई कन्या को यत्नपूर्वक घर में रोक रक्खे (जिससे उसकी कामेच्छा निवृत्त हो जाय)।
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