मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 365
कन्यां भजन्तीमुत्कृष्टं न किंचिदपि दापयेत्‌ । जघन्यं सेवमानां तु संयतां वासयेद्गृहे ।।
अपने से श्रेष्ठ जाति वाले पुरुष के साथ सम्भोग करती हुई कन्या को (राजा) थोड़ा भी दण्डित न करे, किन्तु अपने से हीन जाति वाले पुरुष का सेवन करती हुई कन्या को यत्नपूर्वक घर में रोक रक्खे (जिससे उसकी कामेच्छा निवृत्त हो जाय)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें