योऽकामां दूषयेत्कन्यां स सद्यो वधमर्हति ।
सकामां दूषयंस्तुल्यो न वधं प्राप्नुयान्नरः ।।
समानजातीय कोई पुरुष सम्भोग की इच्छा नहीं करती हुई कन्या को सम्भोग के द्वारा दूषित करे तो वह (ब्राह्मणेतर जाति का होने पर) शीघ्र ही लिङ्गच्छेदन आदि रूप वध से दण्डनीय होता है और सम्भोग की इच्छा करती हुई कन्या को दूषित करने वाला समाजातीय पुरुष (उक्त लिङ्गच्छेदनादि) वध से दण्डनीय नहीं होता (क्योंकि उक्त कार्य गान्धर्व विवाह (३।३२) माना जाता है)।
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