नैष चारणदारेषु विधिर्नात्मोपजीविषु ।
सज्जयन्ति हि ते नारीर्निगूढाश्चारयन्ति च ।।
स्त्रियों के साथ बातचीत करने के निषेध का यह (८।३५४-३६१) विधान नट तथा गायको की स्त्रियों के साथ बातचीत करने में नहीं है; क्योंकि वे (नट, गायक आदि) अपनी स्त्रियों को (शृङ्गार आदि के द्वारा) सुसज्जित कर दूसरों से मिलाते तथा छिपकर स्त्रियों के साथ सम्भोग करते हुए परपुरुष को देखते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।