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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 360
भिक्षुका बन्दिनश्चैव दीक्षिताः कारवस्तथा । सम्भाषणं सह स्त्रीभिः कुर्युरप्रतिवारिताः ।।
भिक्षुक, वन्दी (चारण, भाट आदि) दीक्षित (यज्ञ के लिए दीक्षा ग्रहण किया हुआ। रसोइया (पाचक) परस्त्री के साथ अनिवारितरूप में बातचीत करे अर्थात्‌ इनका बातचीत करना 'संग्रहण' नहीं है अतएव परस्त्री के साथ बातचीत करने पर ये दण्डनीय भी नहीं है।
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