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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 36
विद्वांस्तु ब्राह्मणो दृष्टवा पूर्वोपनिहितं निधिम्‌ । अशेषतोऽप्याददीत सर्वस्याधिपतिर्हि सः ।।
विद्वान्‌ ब्राह्मण तो पूर्वस्थापित धन को देखकर सब धन ले ले (षष्ठांशभाग भी राजा को न दे) क्योंकि वह (विद्वान्‌ ब्राह्मण) सबका स्वामी है।
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