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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 359
अब्राह्मणः सङ्ग्रहणे प्राणान्तं दण्डमर्हति । चतुर्णामपि वर्णानां दारा रक्ष्यतमाः सदा ।।
अब्राह्मण अर्थात्‌ शुद्र पुरुष यदि सम्भोगादि की इच्छा नहीं करने वाली ब्राह्मणी का “संग्रहण" (८।३५७-३५८) करे तो वह प्राणदण्ड (फाँसी देने) के योग्य होता है; क्योंकि चारों वर्णो की स्त्रीयाँ सर्वदा रक्षणीय हैं।
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