अब्राह्मण अर्थात् शुद्र पुरुष यदि सम्भोगादि की इच्छा नहीं करने वाली ब्राह्मणी का “संग्रहण" (८।३५७-३५८) करे तो वह प्राणदण्ड (फाँसी देने) के योग्य होता है; क्योंकि चारों वर्णो की स्त्रीयाँ सर्वदा रक्षणीय हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।