स्त्रियं स्पृशेददेशे यः स्पृष्टो वा मर्षयेत्तया ।
परस्परस्यानुमते सर्व सङ्ग्रहणं स्मृतम् ।।
यदि पुरुष परस्त्री के अस्पृश्य अङ्ग (जङ्घा, स्तन, गाल आदि अङ्ग) का स्पर्श करे, या उसके द्वारा अपने अङ्ग से स्पर्श करने पर सहन करे (रुष्ट नहीं होवे), ये सब कार्य परस्पर में अनुमति (राजीखुशी) से हो तो ये संग्रहण” कहे गये हैं।
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