परस्त्री के पास सुगन्धित तेल-फुलेल, इत्र-माला आदि भेजना, केलि (हंसी-मजाक आदि) करना, उसके भूषण तथा वस्त्रों का स्पर्श करना और साथ में एक खाट पर बैठना (यहाँ सर्वत्र निर्जन अर्थात् बिलकुल एकान्त स्थान से तात्पर्य है) ये सब कार्य मनु आदि ऋषियों के द्वारा 'संग्रहण' कहा गया है।
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