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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 357
उपकारक्रियाकेलिः स्पर्शो भूषणवाससाम्‌ । सह खट्वासनं चैव सर्व सङ्ग्रहणं स्मृतम्‌ ।।
परस्त्री के पास सुगन्धित तेल-फुलेल, इत्र-माला आदि भेजना, केलि (हंसी-मजाक आदि) करना, उसके भूषण तथा वस्त्रों का स्पर्श करना और साथ में एक खाट पर बैठना (यहाँ सर्वत्र निर्जन अर्थात्‌ बिलकुल एकान्त स्थान से तात्पर्य है) ये सब कार्य मनु आदि ऋषियों के द्वारा 'संग्रहण' कहा गया है।
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