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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 354
परस्य पत्न्या पुरुषः सम्भाषां योजयन्‌ रहः । पूर्वमाक्षारितो दोषैः प्राप्नुयात्पूर्वसाहसम्‌ ।।
पहले परस्त्री-सम्भोग-विषयक निन्दा से युक्त जो पुरुष एकान्त में परस्त्री से बातचीत करता हो, उसे प्रथम साहस (८।१३८ अर्थात्‌ २५० पण) से दण्डित करना चाहिए।
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