क्योंकि परस्त्री सम्भोग में वर्णशङ्कर (दोगला) पुत्र उत्पन्न होता है, जिस वर्णसङ्कर से मूल को नष्ट करने वाला अधर्म सबके नाश के लिए समर्थ होता है।
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