गुरु वा बालवृद्धौ वा ब्राह्मणं वा बहुश्रुतम् ।
आततायिनमायान्तं हन्यादेवाविचारयन् ।।
गुरु, बालक, बूढ़ा अथवा बहुश्रुत ब्राह्मण भी आततायी होकर आता हो तो उसे बिना विचारे अर्थात् तत्काल मारना चाहिए।
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