मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 35
अनृतं तु वदन्दण्ड्यः स्ववित्तस्यांशमष्टमम्‌ । तस्यैव वा निधानस्य संख्ययाल्पीयसीं कलाम्‌ ।।
दूसरे के धन को अपना बतलानेवाले अपराधी को उसके धन का अष्टमांश या उसी धन (जिसे वह अपना बतलाता था) के बहुत थोड़े भाग से दण्डित करे अर्थात्‌ उससे जुर्माना वसूल करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें