साहसी (डाकू) मनुष्यों के कारण द्विजों तथा ब्रह्मचर्य आदि आश्रमः वासियों के धर्म का अवरोध होने में, समय-प्रभाव से राज्य के अराजक हो जाने के कारण युद्ध आदि की सम्भावना में, आत्मरक्षा में, दक्षिणा-द्रव्य (गौ आदि) के अपहरण-सम्बन्धी युद्ध में तथा स्त्रियों और ब्राह्मणों की रक्षा में द्विजातियों को शस्त्र ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि धर्मपूर्वक अपराधी को मारता हुआ मनुष्य पापी नहीं होता है।
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