मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 349
शस्त्रं द्विजातिभिर्ग्राह्मं धर्मो यत्रोपरुध्यते । द्विजातीनां च वर्णानां विप्लवे कालकारिते ।।
साहसी (डाकू) मनुष्यों के कारण द्विजों तथा ब्रह्मचर्य आदि आश्रमः वासियों के धर्म का अवरोध होने में, समय-प्रभाव से राज्य के अराजक हो जाने के कारण युद्ध आदि की सम्भावना में, आत्मरक्षा में, दक्षिणा-द्रव्य (गौ आदि) के अपहरण-सम्बन्धी युद्ध में तथा स्त्रियों और ब्राह्मणों की रक्षा में द्विजातियों को शस्त्र ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि धर्मपूर्वक अपराधी को मारता हुआ मनुष्य पापी नहीं होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें