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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 347
ऐन्द्रं स्थानमभ्िप्रेप्सुर्यशश्चाक्षयमव्ययम्‌ । नोपेक्षेत क्षणमपि राजा साहसिकं नरम्‌ ।।
ऐन्द्र पद (सबका आधिपत्यरूप सर्वश्रेष्ठ) अक्षय पद तथा अव्यय यश को चाहने वाला राजा क्षणमात्र भी साहसिक (बलात्कार से गृहदाह तथा जन-धन का अपहरण करने वाले अर्थात्‌ डाकू) व्यक्ति की उपेक्षा न करे, (किन्तु तत्काल उन्हें दण्डित करे।
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