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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 344
वाब्दुष्टात्तस्कराच्चैव दण्डेनैव च हिंसतः । साहसस्य नरः कर्ता विज्ञेयः पापकृत्तमः ।।
कटु वचन बोलने वाला, चोर और डण्डे (या लाठी या शस्नादि) से मारपीट करने वाला, इन तीनों की अपेक्षा साहस (बलात्कारपूर्वक धन-जन का अपहरण) करने वाला मनुष्य अधिक पापी होता है।
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