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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 342
अनेन विधिना राजा कुर्वाणः स्तेननिग्रहम्‌ । यशोऽस्मिन्प्राप्नुयाल्लोके प्रेत्य चानुत्तमं सुखम्‌ ।।
इस विधि (३०१-३४२) से चोर को दण्डित करता हुआ राजा इस लोक में ख्याति तथा मरकर परलोक में अनुत्तम सुख पाता है।
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