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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 341
असंदितानां संदाता संदितानां च मोक्षकः । दासाश्वरथहर्ता च प्राप्तः स्याच्चोरकिल्बिषम्‌ ।।
बिना बँधे हुए दूसरे के पशु (घोड़ा, गाय, बैल, बछवा आदि) को बाँध लेने वाला, बाँधे हुए दूसरे के पशुओं को खोल देने वाला तथा दास, घोड़ा और रथ (गाड़ी, तागा, एक्का आदि सवारी को) चुराने वाला (बड़े-छोटे अपराध के अनुसार अधिक या कम) चोर के समान (मारण, अङ्गच्छेदन, धनादि ग्रहण अर्थात्‌ जुर्माना आदि) दण्ड के द्वारा दण्डनीय होता है।
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