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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 336
अष्टापाद्यं तु शूद्रस्य स्तेये भवति किल्बिषम्‌ । षोडशैव तु वैश्यस्य द्वात्रिंशतक्षत्रियस्य च ।।
चोरी के गुण तथा दोष को जानने वाले शूद्र के चोरी करने पर चोरी के विषय में शूद्र को आठगुना, वैश्य को सोलहगुना, क्षत्रिय को बत्तीसगुना और
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