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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 335
कार्षापणं भवेद्दण्ड्यो यत्रान्यः प्राकृतो जनः । तत्र राजा भवेहदण्ड्यः सहस्रमिति धारणा ।।
जिस अपराध में साधारण मनुष्य एक पण से दण्डनीय है, उसी अपराध में राजा सहस्र पण से दण्डनीय है, ऐसा शास्त्र का निर्णय है।
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