पिताऽऽचार्यः सुहन्माता भार्या पुत्रः पुरोहितः ।
नादण्ड्यो नाम राज्ञोऽस्ति यः स्वधर्मे न तिष्ठति ।।
पिता, आचार्य, मित्र, माता, स्त्री, पुत्र और पुरोहित इनमें जो अपने धर्म में नहीं रहता, वह क्या राजा का दण्डनीय नहीं है? अर्थात् पूज्य या निकट सम्बन्धी होने पर भी वह दण्डनीय ही है।
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