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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 332
यस्त्वेतान्युपक्लप्तानि द्रव्याणि स्तेनयेन्नरः । तं शतं दण्डयेद्राजा यश्चाग्निं चोरयेद्गृहात्‌ ।।
जो साफ-सुथरी करके उपभोग में लाने योग्य बनायी गयी सूत्र आदि (८।३२६-३२९) वस्तुओं की तथा अग्निहोत्र से त्रेताग्नि की चोरी करे; राजा उसको प्रथम साहस (८।१३८ अर्थात्‌ २५० पण) से दण्डित करे।
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