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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 329
पुष्पेषु हरिते धान्ये गुल्मवल्लीनगेषु च । अन्येष्वपरिपूतेषु दण्डः स्यात्पञ्चकृष्णलः ।।
फूल, हरा धान्य, विना घेरे हुए गुल्म, वेलि, वृक्ष, बिना साफ किये (नहीं ओसाये गये) धान्य के (बाँधकर भरपूर बोझ को) चुराने वाले पर (देश, काल, पात्र आदि के अनुसार सोने या चाँदी का) पाँच 'कृष्णल' (८।१३४) अर्थात्‌ एक आना भर दण्ड करना चाहिये।
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