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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 321
पञ्चाशतस्त्वभ्यधिके हस्तच्छेदनमिष्यते । शेषे त्वेकादशगुणं मूल्याइण्डं प्रकल्पयेत्‌ ।।
(सोना, चाँदी आदि काँटे पर तौलकर बेची जाने वाली वस्तु तथा बहुमूल्य रेशमी वस्रादि को) ५० पल से अधिक १०० पल तक चुराने वाले का हाथ काटने का दण्ड (मनु आदि ने) कहा है और शेष (एक पल से पचास पल तक उक्त वस्तुओं को चुराने के अपराध) में राजा चोरित वस्तु का ग्यारह गुना दण्ड निश्चत करे।
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