तथा धरिममेयानां शतादभ्यधिके वधः ।
सुवर्णरजतादीनामुत्तमानां च वाससाम् ।।
और काँटे से तौलने योग्य सोना, चाँदी आदि तथा उत्तम वस्त्र सौ पल से अधिक चुराने वाले को राजा वध (देश, काल, चोर, द्रव्य के स्वामी की जाति तथा गुण की अपेक्षा से ताडन अङ्गच्छेदन और मारण तक) से दण्डित करे।
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