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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 32
आददीताथ षड्भागं प्रनष्टाधिगतान्नपः । दशमं द्वादशं वाऽपि सतां धर्ममनुस्मरन्‌ ।।
अस्वामिक (लावारिस) धन को अपना बतलानेवाला व्यक्ति (उस धन के रंग रूप, नष्ट होने का स्थान, प्रमाण आदि ठीक-ठीक बतला दे, तब राजा उसं धन में पात्र के अनुसार षष्ठांश; दशमांश या द्रादशांश धन को धर्म का स्मरण करता हुआ) (ऐसे अस्वामिक धन में से इतना भाग लेना राजा का धर्म है” यह मानता हुआ) ग्रहण करे (तथा शेष धन उस व्यक्ति को देवे)।
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