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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 319
धान्यं दशभ्यः कुम्भेभ्यो हरतोऽ भ्यधिकं वधः । शेषेऽप्येकादशगुणं दाप्यस्तस्य च तद्धनम्‌ ।।
राजा दश कुम्भ से अधिक धान्य (अन्न) चुराने वाले को वध (चुराने वाले तथा धान्य के स्वामी के गुणादि के अनुसार ताडून, अङ्गच्छेदन एवं वध तक) से दण्डित करे। शेष (एक कुम्भ से अधिक दस कुम्भ तक धान्य चुराने के अपराध) में चुराये हुए धान्य के ग्यारह गुने धान्य से चोर को दण्डित करे और धान्य के स्वामी का जितना धान्य चुराया गया हो उतना वापस दिलवा दे।
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