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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 318
यस्तु रज्जुं घटं कूपाद्धरेद्भिद्याच्च यः प्रपाम्‌ । स दण्डं प्राप्नुयान्माषं तच्च तस्मिन्समाहरेत्‌ ।।
जो कुएँ की रस्सी या घड़ा चुराता है अथवा प्याऊ (पौसरा) तोडता है वह एक मासे सुवर्ण से दण्डनीय होता है और उसे उक्त चोरित रस्सी तथा घड़े को लाना तथा प्याऊ को बनवाना भी पड़ता है।
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