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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 315
शासनाद्वा विमोक्षाद्वा स्तेनः स्तेयाद्विमुच्यते । ह अशासित्वा तु तं राजा स्तेनस्याप्नोति किल्विषम्‌ ।।
(मुशल आदि-पूर्व श्लोकोक्त (८।३१५) शस्त्रों में से जिस शस्त्र को चोर लाया हो उससे) एक बार राजा के द्वारा मारने के कारण प्राणत्याग करने से या मरे हुए के समान जीवित भी उस चोर को छोड देने से वह चोर चोरी के पाप से छूट जाता है; किन्तु (दया आदि के कारण) उसे दण्डित नहीं करने वाला उस चोर के पाप को प्राप्त करता है।
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